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| Gramm-Inh. | Nominativ | Akkusativ | Dativ | Genitiv I | Genitiv II |
| Übersicht über die Akkusativfunktionen
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1. Akkusativ als ZieladverbialeFrage: "wohin?"
Zielangabe
ohne Präpos. nur dichterisch
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| εἰς τὴν πόλιν ἔρχεσθαι | in die Stadt gehen |
| ὡς βασιλέα ἰέναι | zum Großkönig gehen |
2. Akkusativ der räumlichen und zeitlichen AusdehnungFrage: "wie weit? wie lange? ..."
Ausdehnung
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| πέντε σταθμοὺς ἐπορεύοντο | sie marschierten fünf Tagesstrecken (weit) |
| ἡ πόλις μύρια στάδια ἀπεῖχεν | die Stadt war 10000 Stadien entfernt |
| πολὺν χρόνον ἔμεινε | er blieb lange Zeit |
| δέκα ἡμέρας ἔμεινε | er blieb zehn Tage (lang) |
| τριάκοντα ἔτη γεγονώς | dreißig Jahre alt |
| ἐνάτην ἡμέραν | den neunten Tag, seit acht Tagen |
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jetzt das dritte Jahr; seit zwei Jahren |
| 3. accusativus respectus
Frage: "in welcher Hinsicht?"
Beziehung, Hinsicht, Einschränkung
häufiger als der Dat. resp.
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| bei Verben | |
| κάμνω τοὺς ὀφθαλμούς | leide an den Augen |
| τὴν ψυχὴν ἐνόσησεν | er wurde seelisch krank |
| τὰς φρένας ὑγιαίνειν | geistig gesund sein |
| εὖ ἔχω τὸ σῶμα | befinde mich körperlich gut |
| bei Adjektiven | |
| καθαρὸς τὰς χεῖρας | mit sauberen Händen |
| χωλὸς τὸν ἕτερον πόδα | lahm an einem Fuß |
| τυφλὸς τὰ ὄμματ’ εἶ | du bist blind an deinen Augen |
| δύσκολος τὴν φύσιν | von mürrischer Natur |
| δεινὸς τὴν τέχνην ἐστίν | er ist ein geschickter Handwerker |
| bei Substantiven | |
| πόλις Θάψακος ὄνομα | eine Stadt namens Thapsos |
| ἀνὴρ Λυδὸς τὸ γένος | seiner Abstammung nach ein Lyder |
| καλὸς τὸ εἶδος | schön aussehend (dem Aussehen nach) |
| bei Maßangaben | |
| πέντε στάδια τὸ εὖρος | fünf Stadien breit |
| δέκα τὸν ἀριθμόν | zehn an der Zahl |
| πόσοι τὸ πλῆθος; | wie viele an der Zahl? |
| τὸ μέγεθος | an Größe; groß |
| τὸ μῆκος | an Länge; lang |
| τὸ ὕψος | an Höhe; hoch |
| τὸ βάθος | an Tiefe; tief |
| 4. Adverbieller
Akkusativ
Frage: "in welcher Hinsicht?"
Beziehung, Hinsicht
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| Pronomina im Neutrum | |
| τί | in welcher Hinsicht? warum? |
| τι | irgendwie, einigermaßen |
| οὐδέν | in keiner Weise; überhaupt nicht |
| τοῦτο | in dieser Hinsicht, darum |
| τοῦτο ἀφικόμην, ὥστε... | darum kam ich, damit... |
| τοῦτο μὲν... τοῦτο δέ | teils ...teils; einerseits ... andererseits |
| τὸ μὲν... τὸ δέ | teils... teils; einerseits ... andererseits |
| τὰ μὲν... τὰ δέ | teils... teils; einerseits ... andererseits |
| Adjektive im Neutrum | |
| πολλά | häufig, vielfach |
| τὰ πολλά | meistens, in der Regel |
| πολύ | bei weitem |
| τἆλλα | im übrigen |
| τὸ σύμπαν (τὸ παράπαν) | überhaupt |
| πάντα (εὐδαιμονεῖν) | in allem, in jeder Beziehung (Erfolg haben) |
| τὰ πάντα | insgesamt, im ganzen, in jeder Beziehung; durchaus |
| τὸ πρῶτον | zuerst; erstens |
| τὸ λοιπόν | weiterhin, in Zukunft |
| πρότερον | früher, vorher |
| τὸ παλαιόν | vor alters |
| τὸ τελευταῖον | schließlich, endlich |
| τὸ ἐναντίον | im Gegenteil |
| πᾶν τοὐναντίον | ganz im Gegenteil |
| τὸ ἐλάχιστον | wenigstens |
| Substantive | |
| ἀρχήν (τὴν ἀρχήν) | anfangs, überhaupt |
| ἀρχὴν οὐ | überhaupt nicht |
| (τὸ) τέλος | schließlich |
| μακρὰν (ὁδόν) | weit; einen weiten Weg |
| πρόφασιν | angeblich |
| τὴν ταχίστην (ὁδόν) | schleunigst |
| τὴν πρώτην (ὁδόν) | zuerst, anfangs |
| τοῦτον τὸ τρόπον | auf diese Art und Weise; so |
| τίνα τρόπον; | auf welche Art und Weise; wie |
| πάντα τὸν τρόπον | auf jede Art und Weise |
| τὸ κατ’ ἐμέ | was mich betrifft |
| τοῦ κέρδους χάριν | dem Vorteil zuliebe; um des Vorteils willen |
| κυνὸς δίκην | nach Art eines Hundes |
| substant. Adverbien | |
| τὸ πρίν | früher |
| τὸ νῦν | jetzt |
| τὸ πάλαι | längst, von Anfang an |
| 5. Akkusativ als äußeres
(affiziertes) Objekt
Frage: "wen?"
Handlungsziel
Deutsche Intransitiva
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| Verb. d. Nützens u. Schadens | |
| ὠφελοῦμεν τοὺς πένητας | wir nützen den Armen |
| ὀνίναμεν τὴν πόλιν | wir nützen der Stadt |
| βλάπτω τοὺς κακούς | ich schade den Schlechten |
| οὐκ ἀδικῶ οὐδένα | ich tue niemandem Unrecht |
| εὐεργετεῖτε πάντας | tut allen wohl! |
| μὴ μόνον τὸν φίλον εὖ ποίει | tue nicht nur deinem Freund Gutes! |
| εὖ λέγετε πάντας | redet über alle gut! |
| μὴ κακῶς λέγε μηδένα | rede über niemanden schlecht! |
| λοιδορῶ τοὺς λοιδοροῦντας | ich schelte die, die mich schelten |
| κολακεύουσι τοὺς ξένους | sie schmeicheln ihren Gästen |
| ὑβρίζεις τοὺς θεούς | du frevelst gegen die Götter |
| τιμωρησόμεθα τοὺς πολεμίους | wir werden Rache nehmen an den Feinden |
| Verben des Strebens u. Meidens | |
| μιμεῖσθε τοὺς ἀγαθούς | ahmt die Tapferen nach! |
| ζηλοῦτε τοὺς ἀγαθούς | eifert den Tapferen nach! |
| πολλοὶ τὸν πλοῦτον θηρῶσιν | viele jagen dem Reichtum nach |
| πολλοὶ τὰς ἡδονὰς θηρεύουσιν | viele jagen nach Lust |
| φεύγω τοὺς ἐχθρούς | ich fliehe vor den Feinden |
| ἀποφεύγω τοὺς ἐχθρούς | ich entfliehe den Feinden |
| ὁ δοῦλος ἀπέδρα τὸν δεσπότην | der Sklave entlief seinem Herrn |
| οὐδεὶς λανθάνει τὸν θεόν | niemand ist vor Gott verborgen |
| φθάνω τὸν βραδύν | komme dem Langsamen zuvor |
| τὰ ἐπιτήδεια ἡμᾶς ἐπιλείπει | der Proviant geht uns aus |
| Verb. d. Scham u. d. Furcht | |
| αἰσχύνομαι τοὺς φίλους | schäme mich vor meinen Freunden |
| αἰδοῦμαι τοὺς θεούς | scheue mich vor den Göttern |
| θαρροῦμεν τὸν πόλεμον | wir fürchten uns nicht vor dem Krieg |
| φοβοῦμαί τινα | fürchte mich vor jdm. |
| δέδοικα (δέδια) τὸν κίνδυνον | fürchte die Gefahr |
| τρέω τινά | zittere, ängstige mich vor jdm. |
| ἐκπληττομαί τινα | erschrecke vor jdm. |
| καταπληττομαί τινα | erschrecke vor jdm. |
| φυλάττομαί τινα | hüte mich vor jdm. |
| εὐλαβοῦμαί τινα | nehme mich vor jdm. in acht |
| ἀμυνομαί τινα | wehre mich, verteidige mich gegen jdn. |
| τιμωροῦμαί τινα | räche mich an jdm. |
| Verb. d. Schwörens | |
| ὄμνυμι πάντας τοὺς θεούς | schwöre bei allen Göttern |
| ἐπιώρκησε τοὺς θεούς | er legte vor den Göttern einen Meineid ab |
| νὴ Δία | ja, bei Zeus! |
| οὐ μὰ τοὺς θεούς | nein, bei den Göttern! |
| trans. u. intrans. Gebrauch | |
| μένω τινά | warte auf jdn.; erwarte jdn. |
| σπεύδω τι | fördere, beschleunige etwas |
| σπουδάζω τι | fördere, betreibe etwas eifrig |
| δακρύομεν τοὺς τεθνεῶτας | wir beweinen die Toten |
| πλέω τὴν θάλατταν | befahre das Meer |
| καρτερεῖν τοὺς πόνους | die Strapazen ertragen |
| ὑφίστασθαι τοὺς κινδύνους | sich den Gefahren unterziehen, die Gefahren bestehen |
| σιγῶσι τἠν ἧτταν | sie verschweigen die Niederlage |
| διαβαίνω τὸν ποταμόν | überquere den Fluß |
| διερχόμεθα τὰς ὁδούς | wir durchziehen die Wege |
| παραβαίνω τοὺς νόμους | übertrete die Gesetze |
| πάριμεν τὸ στρατόπεδον | wir gehen am Lager vorbei |
| παραπλέομεν τὴν νῆσον | wir segeln an der Insel vorbei |
| περιπλέομεν τὴν νῆσον | wir segeln um die Insel herum |
| ὑπερβαίνω τὸ ὄρος | übersteige den Berg |
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| 6. Inneres Objekt
Frage: "wen od. was?"
Handlungsziel
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| effiziertes Objekt | |
| νομίσματα κόπτειν | Münzen prägen |
| τάφρον ὀρύττειν | einen Graben ausheben |
| ὁδόν τέμνειν | einen Weg bahnen |
| σπονδὰς τέμνειν | einen Vertrag schließen |
| πόλεμον ταράττειν | einen Krieg anzetteln |
| γνώμην νικᾶν | mit seinem Antrag durchdringen |
| Inhaltsobjekt (figura etymologica) | |
| δεινὴν μάχην μάχεσθαι | einen schrecklichen Kampf liefern |
| ἔσχατον κίνδυνον κινδυνεύειν | in äußerster Gefahr schweben |
| καλὸν ἔργον ἐργάζεσθαι | ein schönes Werk ausführen |
| ἱερὸν πόλεμον στρατεῦσαι | einen heiligen Krieg führen |
| ἄλλην ὁδὸν ἔρχεσθαι | einen anderen Weg kommen |
| adverbialer Akk. im Neutrum | |
| ὑψηλὰ ἅλλομαι | springe hoch |
| Ὀλὑμπια νικᾶν | bei den Olympien siegen |
| ἡδὺ γελᾶν | (süß) herzlich lachen |
| ὀξὺ βλέπειν | scharf sehen |
| μέγα φρονεῖν | stolz sein |
| δεινὰ ὑβρίζειν | furchtbar freveln |
| πάντα νικᾶν | in allem siegen |
| πολλὰ ψεύδεσθαι | viele Lügen vortragen |
| μεγάλα καὶ σφόδρα νοσεῖν | sehr schwer erkrankt sein |
| 7. Doppelter
Akk. a) des Objekts und b) des Prädikativums
Frage: "wen als was?"
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| "machen zu" | |
| στρατηγὸν ἀποδεικνύναι τινά | jdn. zum Feldherrn machen |
| ἡγεμόνα αἱρεῖσθαί τινα | jdn. als Führer wählen |
| ἡγεμόνα χειροτονεῖν τινα | jdn. (durch Handzeichen) zum Führer bestimmen |
| ἄρχοντα καθιστάναι τινά | jdn. als Archonten einsetzen |
| Δαρεῖος Κῦρον στρατηγὸν ἐποίησεν | Dareios machte Kyros zum Satrapen |
| τιθέναι τινά τι | jdn. zu etw. machen |
| λαμβάνειν τινά τι | jdn. als etw. nehmen |
| κτᾶσθαί τινά τι | jdn. als etw. erwerben |
| "halten für" | |
| φίλον νομίζειν (κρίνειν) τινά | jdn. für einen Freund halten |
| εὺεργέτην σε ἡγοῦμαι | wir halten dich für einen Wohltäter |
| "bezeichnen als" | |
| φίλον λέγειν τινά | jdn. als Freund bezeichnen |
| φίλον καλεῖν τινά | jdn. Freund nennen |
| φίλον ὀνομάζειν τινά | jdn. als Freund bezeichnen |
| "sich zeigen als" | |
| φίλον παρέχειν ἑαυτόν | sich als Freund zeigen (bewähren) |
| 8. Doppelter Akk. a) der Person und
b) der Sache (acc. resp.)
Frage: "wen worin?"
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| "erinnern an" | |
| ἀναμνήσω ὑμᾶς τοὺς κινδύνους | werde euch an die Gefahren erinnern |
| "fragen nach" | |
| ἐρωτῶ τινά τι | ich frage jdn. (nach) etw. |
| "unterrichten in, verheimlichen" | |
| δισάσκω τινά τι | ich unterrichte jdn. in etw.; lehre jdn. etwas |
| κρύπτειν τινά τι | jdm. etwas verheimlichen |
| ἀποκρύπτεσθαί τινά τι | jdm. etwas verheinlichen |
| "bitten um" | |
| αἰτῶ τινά τι | bitte jdn. um etw.: verlange von jdm. etw. |
| ἀπαιτῶ τινά τι | bitte jdn. um etw.; fordere von jdm. etw. zurück |
| πράττομαί τινά τι (χρήματα τοὺς μαθητάς) | fordere, treibe von jdm. etw. ein (Geld von den Schülern) |
| εἰσπράττω τινά τι | fordere von jdm. etw. ein |
| Κῦρον αἰτήσομεν ἡγεμόνα | wir werden von Kyros einen Führer fordern |
| "berauben an" | |
| ἀποστερῶ ὑμᾶς τοῦτο | raube euch dies |
| τοὺς Ἕλληνας τὴν γῆν ἀφαιρεῖσθαι | den Griechen ihr Land wegnehmen |
| ἐκδύειν τινά τι | jdm. etwas ausziehen |
| ἐνδύειν τινά τι | jdm. etwas anziehen |
| ἀμφιεννύναι τινά τι | jdm. etwas anziehen |
| (ἀπο)συλᾶν τινά τι | jdm. etwas (die Rüstung) rauben |
| "antun mit " | |
| πολλὰ κακὰ τοὺς ἄλλους δρᾷ | er tut den andern viel Schlimmes an |
| πλεῖστα κακὰ τὴν πόλιν ἐποίησαν | sie fügten der Stadt schlimmstes Leid zu |
| τί οἱ ἄλλοι ἡμᾶς ἐροῦσιν; | was werden die anderen über uns sagen? |
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Sententiae excerptae:Literatur:
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